नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Summit के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना ने शिखर सम्मेलन की कार्यवाही को अस्थायी रूप से बाधित किया और सार्वजनिक और राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तारियों की पहचान CCTV फुटेज और गवाहों के आधार पर की गई। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी मामले की जांच के हिस्से हैं और आरोप संभावित तौर पर स्थल में अनधिकृत प्रवेश, सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने से जुड़े हो सकते हैं। जांच जारी है और आवश्यकतानुसार और कार्रवाइयाँ की जा सकती हैं।
यूथ कांग्रेस के नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध था, जिसका उद्देश्य AI नीति, रोजगार पर असर, डेटा गोपनीयता और नैतिकता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था। पार्टी ने कहा कि युवाओं की चिंताओं को सुनना और सार्वजनिक विमर्श में शामिल करना ज़रूरी है।
शिखर सम्मेलन के आयोजक और सुरक्षा एजेंसीयों ने आयोजन के दौरान शांति और विनियम बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। कुछ सत्रों में अस्थायी व्यवधान की सूचना मिली और सुरक्षा कड़े कर दी गई। अधिकारियों ने भविष्य के आयोजनों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की बात भी कही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हक है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और संगठित कार्यक्रमों में व्यवधान घटनाओं के मामलों में कानून के दायरे में कार्रवाई संभव है। वे यह भी कहते हैं कि विरोध के वैध साधन जैसे पंजीकृत रैलियाँ, संवाद और पब्लिक फोरम अधिक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प हैं।
यह घटना तकनीकी नीति चर्चा और नागरिक असंतोष के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करती है। कई नागरिक समूह और नीति विश्लेषक आग्रह कर रहे हैं कि AI के नैतिक, पारदर्शिता और रोजगार संबंधी मुद्दों पर व्यापक सार्वजनिक संवाद और औपचारिक परामर्श सुनिश्चित किए जाएँ।
अंततः, शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों की रक्षा के लिए पारदर्शी संवाद, त्वरित कानूनी प्रक्रिया और आयोजकों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद आवश्यक है। मामले की आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारी से जुड़े विवरण परिस्थिति के आगे के विकास के साथ स्पष्ट होंगे।

